apyabhadramanāthāyā dasyubhyo na bhavedbhuvaḥ|| 37
अर्थ
उन दिनों लोकोंमें आतंक फैलानेवाले बहुत-से उपद्रव होते देखकर वे आपसमें कहने लगे, ‘आजकल पृथ्वीका कोई रक्षक नहीं है; इसलिये चोर-डाकुओंके कारण उसका कुछ अमंगल तो नहीं होनेवाला है?’॥ ३७॥
वीक्ष्योत्थितांस्तदोत्पातानाहुर्लोकभयङ्करान्।
अप्यभद्रमनाथाया दस्युभ्यो न भवेद्भुवः॥ ३७
उन दिनों लोकोंमें आतंक फैलानेवाले बहुत-से उपद्रव होते देखकर वे आपसमें कहने लगे, ‘आजकल पृथ्वीका कोई रक्षक नहीं है; इसलिये चोर-डाकुओंके कारण उसका कुछ अमंगल तो नहीं होनेवाला है?’॥ ३७॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 4.14.37 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 481) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/4/14/37/