अपने महलके बगीचेमें इनकी एक बार भगवान् सनत्कुमारसे भेंट होगी। अकेले उनकी भक्तिपूर्वक सेवा करके ये उस निर्मल ज्ञानको प्राप्त करेंगे, जिससे परब्रह्मकी प्राप्ति होती है॥ २५॥✎ 1604
एष स्वसद्मोपवने समेत्य
सनत्कुमारं भगवन्तमेकम्।
आराध्य भक्त्यालभतामलं तज्-
ज्ञानं यतो ब्रह्म परं विदन्ति॥ २५
अपने महलके बगीचेमें इनकी एक बार भगवान् सनत्कुमारसे भेंट होगी। अकेले उनकी भक्तिपूर्वक सेवा करके ये उस निर्मल ज्ञानको प्राप्त करेंगे, जिससे परब्रह्मकी प्राप्ति होती है॥ २५॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 4.16.25 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 488) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/4/16/25/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)