इस प्रकार जब इनके पराक्रम जनताके सामने आ जायँगे, तब ये परमपराक्रमी महाराज जहाँ-तहाँ अपने चरित्रकी ही चर्चा सुनेंगे॥ २६॥✎ 1604
तत्र तत्र गिरस्तास्ता इति विश्रुतविक्रमः।
श्रोष्यत्यात्माश्रिता गाथाः पृथुः पृथुपराक्रमः॥ २६
इस प्रकार जब इनके पराक्रम जनताके सामने आ जायँगे, तब ये परमपराक्रमी महाराज जहाँ-तहाँ अपने चरित्रकी ही चर्चा सुनेंगे॥ २६॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 4.16.26 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 488) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/4/16/26/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)