॥ श्रीहरिः ॥
श्लोक 4.16.6
वसु काल उपादत्ते काले चायं विमुंचति।
समः सर्वेषु भूतेषु प्रतपन् सूर्यवद्विभुः॥ ६
vasu kāla upādatte kāle cāyaṃ vimuṃcati|
samaḥ sarveṣu bhūteṣu pratapan sūryavadvibhuḥ|| 6
अर्थ
ये सूर्यके समान अलौकिक, महिमान्वित, प्रतापवान् और समदर्शी होंगे। जिस प्रकार सूर्य देवता आठ महीने तपते रहकर जल खींचते हैं और वर्षा-ऋतुमें उसे उड़ेल देते हैं, उसी प्रकार ये कर आदिके द्वारा कभी धन-संचय करेंगे और कभी उसका प्रजाके हितके लिये व्यय कर डालेंगे॥ ६॥