श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 4.18.17

चतुर्थ स्कन्ध · अध्याय 18 · अथाष्टादशोऽध्यायः

गन्धर्वाप्सरसोऽधुक्षन् पात्रे पद्ममये पयः।

वत्सं विश्वावसुं कृत्वा गान्धर्वं२ मधु सौभगम्३॥ १७

gandharvāpsaraso'dhukṣan pātre padmamaye payaḥ|

vatsaṃ viśvāvasuṃ kṛtvā gāndharvaṃ madhu saubhagam|| 17

अर्थ

गन्धर्व और अप्सराओंने विश्वावसुको बछड़ा बनाकर कमलरूप पात्रमें संगीतमाधुर्य और सौन्दर्यरूप दूध दुहा॥ १७॥✎ 400

टिप्पणियाँ

  1. २

    प्रा० पा०—गन्धं।

    (मुद्रित पृष्ठ 494)
  2. ३

    प्रा० पा०—ससौभगम्।

    (मुद्रित पृष्ठ 494)
इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
  • #400 शब्दोंके बीचका स्थान: पात्रमेंमदिरा → पात्रमें मदिरा

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