॥ श्रीहरिः ॥
चूर्णयन्२ स्वधनुष्कोट्या गिरिकूटानि राजराट्।
भूमण्डलमिदं वैन्यः प्रायश्चक्रे समं विभुः॥ २९
cūrṇayan svadhanuṣkoṭyā girikūṭāni rājarāṭ|
bhūmaṇḍalamidaṃ vainyaḥ prāyaścakre samaṃ vibhuḥ|| 29
अर्थ
फिर राजाधिराज पृथुने अपने धनुषकी नोकसे पर्वतोंको फोड़कर इस सारे भूमण्डलको प्रायः समतल कर दिया॥ २९॥
चूर्णयन् स्वधनुष्कोट्या गिरिकूटानि राजराट्।
भूमण्डलमिदं वैन्यः प्रायश्चक्रे समं विभुः॥ २९
फिर राजाधिराज पृथुने अपने धनुषकी नोकसे पर्वतोंको फोड़कर इस सारे भूमण्डलको प्रायः समतल कर दिया॥ २९॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 4.18.29 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 495) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/4/18/29/टिप्पणियाँ
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प्रा० पा०—चूर्णयंश्च धनु०।
(मुद्रित पृष्ठ 495)