jaṭilaṃ bhasmanācchannaṃ tasmai bāṇaṃ na muṃcati|| 14
अर्थ
इन्द्र सिरपर जटाजूट और शरीरमें भस्म धारण किये हुए थे। उनका ऐसा वेष देखकर पृथुकुमारने उन्हें मूर्तिमान् धर्म समझा, इसलिये उनपर बाण नहीं छोड़ा॥ १४॥
तं तादृशाकृतिं वीक्ष्य मेने धर्मं शरीरिणम्।
जटिलं भस्मनाच्छन्नं तस्मै बाणं न मुंचति॥ १४
इन्द्र सिरपर जटाजूट और शरीरमें भस्म धारण किये हुए थे। उनका ऐसा वेष देखकर पृथुकुमारने उन्हें मूर्तिमान् धर्म समझा, इसलिये उनपर बाण नहीं छोड़ा॥ १४॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 4.19.14 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 497) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/4/19/14/