भारत! उस यज्ञमें यज्ञसामग्रियोंको देनेवाली भूमिने कामधेनुरूप होकर यजमानकी सारी कामनाओंको पूर्ण किया था॥ ७॥✎ 401
यत्र धर्मदुघा भूमिः सर्वकामदुघा सती।
दोग्धि स्माभीप्सितानर्थान् यजमानस्य भारत॥ ७
भारत! उस यज्ञमें यज्ञसामग्रियोंको देनेवाली भूमिने कामधेनुरूप होकर यजमानकी सारी कामनाओंको पूर्ण किया था॥ ७॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 4.19.7 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 496) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/4/19/7/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)