श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 4.2.10

चतुर्थ स्कन्ध · अध्याय 2 · अथ द्वितीयोऽध्यायः

अयं तु लोकपालानां यशोघ्नो निरपत्रपः।

सद्भिराचरितः पन्था येन स्तब्धेन दूषितः॥ १०

ayaṃ tu lokapālānāṃ yaśoghno nirapatrapaḥ|

sadbhirācaritaḥ panthā yena stabdhena dūṣitaḥ|| 10

अर्थ

यह निर्लज्ज महादेव समस्त लोकपालोंकी पवित्र कीर्तिको धूलमें मिला रहा है। देखिये, इस घमण्डीने सत्पुरुषोंके आचरणको लांछित एवं मटियामेट कर दिया है॥ १०॥

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