‘जो लोग शिवभक्त हैं तथा जो उन भक्तोंके अनुयायी हैं, वे सत्-शास्त्रोंके विरुद्ध आचरण करनेवाले और पाखण्डी हों॥ २८॥
भवव्रतधरा ये च ये च तान् समनुव्रताः।
पाखण्डिनस्ते भवन्तु सच्छास्त्रपरिपन्थिनः॥ २८
‘जो लोग शिवभक्त हैं तथा जो उन भक्तोंके अनुयायी हैं, वे सत्-शास्त्रोंके विरुद्ध आचरण करनेवाले और पाखण्डी हों॥ २८॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 4.2.28 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 414) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/4/2/28/