श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 4.2.28

चतुर्थ स्कन्ध · अध्याय 2 · अथ द्वितीयोऽध्यायः

भवव्रतधरा ये च ये च तान् समनुव्रताः।

पाखण्डिनस्ते भवन्तु सच्छास्त्रपरिपन्थिनः॥ २८

bhavavratadharā ye ca ye ca tān samanuvratāḥ|

pākhaṇḍinaste bhavantu sacchāstraparipanthinaḥ|| 28

अर्थ

‘जो लोग शिवभक्त हैं तथा जो उन भक्तोंके अनुयायी हैं, वे सत्-शास्त्रोंके विरुद्ध आचरण करनेवाले और पाखण्डी हों॥ २८॥

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