vigarhya yāta pāṣaṇḍaṃ daivaṃ vo yatra bhūtarāṭ|| 32
अर्थ
तुमलोग सत्पुरुषोंके परम पवित्र और सनातन मार्गस्वरूप वेदकी निन्दा करते हो—इसलिये उस पाखण्डमार्गमें जाओ, जिसमें भूतोंके सरदार तुम्हारे इष्टदेव निवास करते हैं’॥ ३२॥
तद्ब्रह्म परमं शुद्धं सतां वर्त्म सनातनम्।
विगर्ह्य यात पाषण्डं दैवं वो यत्र भूतराट्॥ ३२
तुमलोग सत्पुरुषोंके परम पवित्र और सनातन मार्गस्वरूप वेदकी निन्दा करते हो—इसलिये उस पाखण्डमार्गमें जाओ, जिसमें भूतोंके सरदार तुम्हारे इष्टदेव निवास करते हैं’॥ ३२॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 4.2.32 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 415) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/4/2/32/