एक बार उन्होंने एक महासत्रकी दीक्षा ली; उस समय वहाँ देवताओं, ब्रह्मर्षियों और राजर्षियोंका बहुत बड़ा समाज एकत्र हुआ॥ १३॥✎ 1332
एकदाऽऽसीन्महासत्रदीक्षा तत्र दिवौकसाम्।
समाजो ब्रह्मर्षीणां च राजर्षीणां च सत्तम॥ १३
एक बार उन्होंने एक महासत्रकी दीक्षा ली; उस समय वहाँ देवताओं, ब्रह्मर्षियों और राजर्षियोंका बहुत बड़ा समाज एकत्र हुआ॥ १३॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 4.21.13 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 507) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/4/21/13/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
#1332 अक्षर (मुद्रित पृष्ठके पाठसे): नक्षत्र-मण्डलमें → नक्षत्रमण्डलमें