॥ श्रीहरिः ॥
श्लोक 4.21.26
यूयं तदनुमोदध्वं पितृदेवर्षयोऽमलाः।
कर्तुः शास्तुरनुज्ञातुस्तुल्यं यत्प्रेत्य तत्फलम्॥ २६
yūyaṃ tadanumodadhvaṃ pitṛdevarṣayo'malāḥ|
kartuḥ śāsturanujñātustulyaṃ yatpretya tatphalam|| 26
अर्थ
विशुद्धचित्त देवता, पितर और महर्षिगण! आप भी मेरी इस प्रार्थनाका अनुमोदन कीजिये; क्योंकि कोई भी कर्म हो, मरनेके अनन्तर उसके कर्ता, उपदेष्टा और समर्थकको उसका समान फल मिलता है॥ २६॥✎ 408