श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 4.21.46

चतुर्थ स्कन्ध · अध्याय 21 · अथैकविंशोऽध्यायः

पुत्रेण जयते लोकानिति सत्यवती श्रुतिः।

ब्रह्मदण्डहतः पापो यद्वेनोऽत्यतरत्तमः॥ ४६

putreṇa jayate lokāniti satyavatī śrutiḥ|

brahmadaṇḍahataḥ pāpo yadveno'tyatarattamaḥ|| 46

अर्थ

उन्होंने कहा, ‘पुत्रके द्वारा पिता पुण्यलोकोंको प्राप्त कर लेता है’ यह श्रुति यथार्थ है; पापी वेन ब्राह्मणोंके शापसे मारा गया था; फिर भी इनके पुण्यबलसे उसका नरकसे निस्तार हो गया॥ ४६॥

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