बिभ्रत् स वैष्णवं तेजो बाह्वोर्याभ्यां दुदोह गाम्॥ ९
so'bhiṣiktaḥ pṛthurviprairlabdhāśeṣasurārhaṇaḥ|
bibhrat sa vaiṣṇavaṃ tejo bāhvoryābhyāṃ dudoha gām|| 9
अर्थ
विदुरजी बोले—ब्रह्मन्! ब्राह्मणोंने पृथुका अभिषेक किया। समस्त देवताओंने उन्हें उपहार दिये। उन्होंने अपनी भुजाओंमें वैष्णव तेजको धारण किया और उससे पृथ्वीका दोहन किया॥ ९॥
सोऽभिषिक्तः पृथुर्विप्रैर्लब्धाशेषसुरार्हणः।
बिभ्रत् स वैष्णवं तेजो बाह्वोर्याभ्यां दुदोह गाम्॥ ९
विदुरजी बोले—ब्रह्मन्! ब्राह्मणोंने पृथुका अभिषेक किया। समस्त देवताओंने उन्हें उपहार दिये। उन्होंने अपनी भुजाओंमें वैष्णव तेजको धारण किया और उससे पृथ्वीका दोहन किया॥ ९॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 4.21.9 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 506) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/4/21/9/