श्रीसनत्कुमारजीने कहा—महाराज! आपने सब कुछ जानते हुए भी समस्त प्राणियोंके कल्याणकी दृष्टिसे बड़ी अच्छी बात पूछी है। सच है, साधुपुरुषोंकी बुद्धि ऐसी ही हुआ करती है॥ १८॥
साधु पृष्टं महाराज सर्वभूतहितात्मना।
भवता विदुषा चापि साधूनां मतिरीदृशी॥ १८
श्रीसनत्कुमारजीने कहा—महाराज! आपने सब कुछ जानते हुए भी समस्त प्राणियोंके कल्याणकी दृष्टिसे बड़ी अच्छी बात पूछी है। सच है, साधुपुरुषोंकी बुद्धि ऐसी ही हुआ करती है॥ १८॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 4.22.18 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 513) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/4/22/18/