श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 4.22.42

चतुर्थ स्कन्ध · अध्याय 22 · अथ द्वाविंशोऽध्यायः

राजोवाच

कृतो मेऽनुग्रहः पूर्वं हरिणाऽऽर्तानुकम्पिना।

तमापादयितुं ब्रह्मन् भगवन् यूयमागताः॥ ४२

kṛto me'nugrahaḥ pūrvaṃ hariṇā''rtānukampinā|

tamāpādayituṃ brahman bhagavan yūyamāgatāḥ|| 42

अर्थ

राजा पृथुने कहा—भगवन्! दीनदयाल श्रीहरिने मुझपर पहले कृपा की थी, उसीको पूर्ण करनेके लिये आपलोग पधारे हैं॥ ४२॥

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