श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 4.22.63

चतुर्थ स्कन्ध · अध्याय 22 · अथ द्वाविंशोऽध्यायः

कीर्त्योर्ध्वगीतया पुम्भिस्त्रैलोक्ये तत्र तत्र ह।

प्रविष्टः कर्णरन्ध्रेषु स्त्रीणां रामः सतामिव॥ ६३

kīrtyordhvagītayā pumbhistrailokye tatra tatra ha|

praviṣṭaḥ karṇarandhreṣu strīṇāṃ rāmaḥ satāmiva|| 63

अर्थ

लोग त्रिलोकीमें सर्वत्र उच्च स्वरसे उनकी कीर्तिका गान करते थे, इससे वे स्त्रियोंतकके कानोंमें वैसे ही प्रवेश पाये हुए थे जैसे सत्पुरुषोंके हृदयमें श्रीराम॥ ६३॥

इति श्रीमद्भागवते महापुराणे पारमहंस्यां संहितायां चतुर्थस्कन्धे पृथुचरिते द्वाविंशोऽध्यायः॥ २२॥

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