श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 4.22.8

चतुर्थ स्कन्ध · अध्याय 22 · अथ द्वाविंशोऽध्यायः

किं तस्य दुर्लभतरमिह लोके परत्र च।

यस्य विप्राः प्रसीदन्ति शिवो विष्णुश्‍च सानुगः॥ ८

kiṃ tasya durlabhataramiha loke paratra ca|

yasya viprāḥ prasīdanti śivo viṣṇuśca sānugaḥ|| 8

अर्थ

जिसपर ब्राह्मण अथवा अनुचरोंके सहित श्रीशंकर या विष्णुभगवान् प्रसन्‍न हों, उसके लिये इहलोक और परलोकमें कौन-सी वस्तु दुर्लभ है॥ ८॥

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