श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 4.23.19

चतुर्थ स्कन्ध · अध्याय 23 · अथ त्रयोविंशोऽध्यायः

अर्चिर्नाम महाराज्ञी तत्पत्न्यनुगता वनम्।

सुकुमार्यतदर्हा च यत्पद‍्भ्यां स्पर्शनं भुवः॥ १९

arcirnāma mahārājñī tatpatnyanugatā vanam|

sukumāryatadarhā ca yatpadbhyāṃ sparśanaṃ bhuvaḥ|| 19

अर्थ

महाराज पृथुकी पत्‍नी महारानी अर्चि भी उनके साथ वनको गयी थीं। वे बड़ी सुकुमारी थीं, पैरोंसे भूमिका स्पर्श करनेयोग्य भी नहीं थीं॥ १९॥

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