sukumāryatadarhā ca yatpadbhyāṃ sparśanaṃ bhuvaḥ|| 19
अर्थ
महाराज पृथुकी पत्नी महारानी अर्चि भी उनके साथ वनको गयी थीं। वे बड़ी सुकुमारी थीं, पैरोंसे भूमिका स्पर्श करनेयोग्य भी नहीं थीं॥ १९॥
अर्चिर्नाम महाराज्ञी तत्पत्न्यनुगता वनम्।
सुकुमार्यतदर्हा च यत्पद्भ्यां स्पर्शनं भुवः॥ १९
महाराज पृथुकी पत्नी महारानी अर्चि भी उनके साथ वनको गयी थीं। वे बड़ी सुकुमारी थीं, पैरोंसे भूमिका स्पर्श करनेयोग्य भी नहीं थीं॥ १९॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 4.23.19 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 521) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/4/23/19/