॥ श्रीहरिः ॥
श्लोक 4.23.35
धन्यं यशस्यमायुष्यं स्वर्ग्यं कलिमलापहम्।
धर्मार्थकाममोक्षाणां सम्यक्सिद्धिमभीप्सुभिः।
श्रद्धयैतदनुश्राव्यं चतुर्णां कारणं परम्॥ ३५
dhanyaṃ yaśasyamāyuṣyaṃ svargyaṃ kalimalāpaham|
dharmārthakāmamokṣāṇāṃ samyaksiddhimabhīpsubhiḥ|
śraddhayaitadanuśrāvyaṃ caturṇāṃ kāraṇaṃ param|| 35
अर्थ
यह धन, यश और आयुकी वृद्धि करनेवाला, स्वर्गकी प्राप्ति करानेवाला और कलियुगके दोषोंका नाश करनेवाला है। यह धर्मादि चतुर्वर्गकी प्राप्तिमें भी बड़ा सहायक है; इसलिये जो लोग धर्म, अर्थ, काम और मोक्षको भलीभाँति सिद्ध करना चाहते हों, उन्हें इसका श्रद्धापूर्वक श्रवण करना चाहिये॥ ३५॥✎ 411