घरसे तपस्या करनेके लिये जाते समय मार्गमें श्रीमहादेवजीने उन्हें दर्शन देकर कृपापूर्वक जिस तत्त्वका उपदेश दिया था, उसीका वे एकाग्रतापूर्वक ध्यान, जप और पूजन करते रहे॥ १५॥✎ 1606
यदुक्तं पथि दृष्टेन गिरिशेन प्रसीदता।
तद्ध्यायन्तो जपन्तश्च पूजयन्तश्च संयताः॥ १५
घरसे तपस्या करनेके लिये जाते समय मार्गमें श्रीमहादेवजीने उन्हें दर्शन देकर कृपापूर्वक जिस तत्त्वका उपदेश दिया था, उसीका वे एकाग्रतापूर्वक ध्यान, जप और पूजन करते रहे॥ १५॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 4.24.15 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 525) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/4/24/15/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)