bhagavantaṃ vāsudevaṃ prapannaḥ sa priyo hi me|| 28
अर्थ
जो व्यक्ति अव्यक्त प्रकृति तथा जीवसंज्ञक पुरुष—इन दोनोंके नियामक भगवान् वासुदेवकी साक्षात् शरण लेता है, वह मुझे परम प्रिय है॥ २८॥
यः परं रंहसः साक्षात्त्रिगुणाज्जीवसंज्ञितात्।
भगवन्तं वासुदेवं प्रपन्नः स प्रियो हि मे॥ २८
जो व्यक्ति अव्यक्त प्रकृति तथा जीवसंज्ञक पुरुष—इन दोनोंके नियामक भगवान् वासुदेवकी साक्षात् शरण लेता है, वह मुझे परम प्रिय है॥ २८॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 4.24.28 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 526) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/4/24/28/