श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 4.24.37

चतुर्थ स्कन्ध · अध्याय 24 · अथ चतुर्विंशोऽध्यायः

स्वर्गापवर्गद्वाराय नित्यं शुचिषदे नमः।

नमो हिरण्यवीर्याय चातुर्होत्राय तन्तवे॥ ३७

svargāpavargadvārāya nityaṃ śuciṣade namaḥ|

namo hiraṇyavīryāya cāturhotrāya tantave|| 37

अर्थ

आप स्वर्ग और मोक्षके द्वार तथा निरन्तर पवित्र हृदयमें रहनेवाले हैं, आपको नमस्कार है। आप ही सुवर्णरूप वीर्यसे युक्त और चातुर्होत्र कर्मके साधन तथा विस्तार करनेवाले अग्‍निदेव हैं; आपको नमस्कार है॥ ३७॥✎ 1333 1334

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (2)
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