श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 4.24.38

चतुर्थ स्कन्ध · अध्याय 24 · अथ चतुर्विंशोऽध्यायः

नम ऊर्ज इषे त्रय्याः पतये यज्ञरेतसे।

तृप्तिदाय च जीवानां नमः सर्वरसात्मने॥ ३८

nama ūrja iṣe trayyāḥ pataye yajñaretase|

tṛptidāya ca jīvānāṃ namaḥ sarvarasātmane|| 38

अर्थ

आप पितर और देवताओंके पोषक सोम हैं तथा तीनों वेदोंके अधिष्ठाता हैं; हम आपको नमस्कार करते हैं, आप ही समस्त प्राणियोंको तृप्त करनेवाले सर्वरस (जल) रूप हैं; आपको नमस्कार है॥ ३८॥✎ 1333 1334

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (2)
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