श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 4.24.39

चतुर्थ स्कन्ध · अध्याय 24 · अथ चतुर्विंशोऽध्यायः

सर्वसत्त्वात्मदेहाय विशेषाय स्थवीयसे।

नमस्त्रैलोक्यपालाय सहओजोबलाय च॥ ३९

sarvasattvātmadehāya viśeṣāya sthavīyase|

namastrailokyapālāya sahaojobalāya ca|| 39

अर्थ

आप समस्त प्राणियोंके देह, पृथ्वी और विराट्स्वरूप हैं तथा त्रिलोकीकी रक्षा करनेवाले मानसिक, ऐन्द्रियिक और शारीरिक शक्तिस्वरूप वायु (प्राण) हैं; आपको नमस्कार है॥ ३९॥✎ 1333 1334

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (2)
  • #1333 अक्षर (मुद्रित पृष्ठके पाठसे): अभि-व्यक्ति → अभिव्यक्ति
  • #1334 अक्षर (मुद्रित पृष्ठके पाठसे): प्रकार-की → प्रकारकी

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