आप समस्त प्राणियोंके देह, पृथ्वी और विराट्स्वरूप हैं तथा त्रिलोकीकी रक्षा करनेवाले मानसिक, ऐन्द्रियिक और शारीरिक शक्तिस्वरूप वायु (प्राण) हैं; आपको नमस्कार है॥ ३९॥✎ 13331334
सर्वसत्त्वात्मदेहाय विशेषाय स्थवीयसे।
नमस्त्रैलोक्यपालाय सहओजोबलाय च॥ ३९
आप समस्त प्राणियोंके देह, पृथ्वी और विराट्स्वरूप हैं तथा त्रिलोकीकी रक्षा करनेवाले मानसिक, ऐन्द्रियिक और शारीरिक शक्तिस्वरूप वायु (प्राण) हैं; आपको नमस्कार है॥ ३९॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 4.24.39 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 528) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/4/24/39/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (2)
#1333 अक्षर (मुद्रित पृष्ठके पाठसे): अभि-व्यक्ति → अभिव्यक्ति
#1334 अक्षर (मुद्रित पृष्ठके पाठसे): प्रकार-की → प्रकारकी