॥ श्रीहरिः ॥
श्लोक 4.24.6
राज्ञां वृत्तिं करादानदण्डशुल्कादिदारुणाम्।
मन्यमानो दीर्घसत्रव्याजेन विससर्ज ह॥ ६
rājñāṃ vṛttiṃ karādānadaṇḍaśulkādidāruṇām|
manyamāno dīrghasatravyājena visasarja ha|| 6
अर्थ
राजा अन्तर्धानने कर लेना, दण्ड देना, जुरमाना वसूल करना आदि कर्तव्योंको बहुत कठोर एवं दूसरोंके लिये कष्टदायक समझकर एक दीर्घकालीन यज्ञमें दीक्षित होनेके बहाने अपना राज-काज छोड़ दिया॥ ६॥