यह स्तोत्र पूर्वकालमें जगद्विस्तारके इच्छुक प्रजापतियोंके पति भगवान् ब्रह्माजीने प्रजा उत्पन्न करनेकी इच्छावाले हम भृगु आदि अपने पुत्रोंको सुनाया था॥ ७२॥✎ 4151335
इदमाह पुरास्माकं भगवान् विश्वसृक्पतिः।
भृग्वादीनामात्मजानां सिसृक्षुः संसिसृक्षताम्॥ ७२
यह स्तोत्र पूर्वकालमें जगद्विस्तारके इच्छुक प्रजापतियोंके पति भगवान् ब्रह्माजीने प्रजा उत्पन्न करनेकी इच्छावाले हम भृगु आदि अपने पुत्रोंको सुनाया था॥ ७२॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 4.24.72 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 532) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/4/24/72/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (2)
#415 शब्दोंके बीचका स्थान: भगवान् में → भगवान्में
#1335 अक्षर (मुद्रित पृष्ठके पाठसे): करेेंगे॥ → करेंगे॥