श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 4.25.20

चतुर्थ स्कन्ध · अध्याय 25 · अथ पञ्चविंशोऽध्यायः

यदृच्छयाऽऽगतां तत्र ददर्श प्रमदोत्तमाम्।

भृत्यैर्दशभिरायान्तीमेकैकशतनायकैः ॥ २०

yadṛcchayā''gatāṃ tatra dadarśa pramadottamām|

bhṛtyairdaśabhirāyāntīmekaikaśatanāyakaiḥ || 20

अर्थ

राजा पुरंजनने उस अद्भुत वनमें घूमते-घूमते एक सुन्दरीको आते देखा, जो अकस्मात् उधर चली आयी थी। उसके साथ दस सेवक थे, जिनमेंसे प्रत्येक सौ-सौ नायिकाओंका पति था॥ २०॥

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