॥ श्रीहरिः ॥
स्तनौ व्यञ्जितकैशोरौ समवृत्तौ निरन्तरौ।
वस्त्रान्तेन निगूहन्तीं व्रीडया गजगामिनीम्॥ २४
stanau vyañjitakaiśorau samavṛttau nirantarau|
vastrāntena nigūhantīṃ vrīḍayā gajagāminīm|| 24
अर्थ
वह गजगामिनी बाला किशोरावस्थाकी सूचना देनेवाले अपने गोल-गोल समान और परस्पर सटे हुए स्तनोंको लज्जावश बार-बार अंचलसे ढकती जाती थी॥ २४॥
स्तनौ व्यञ्जितकैशोरौ समवृत्तौ निरन्तरौ।
वस्त्रान्तेन निगूहन्तीं व्रीडया गजगामिनीम्॥ २४
वह गजगामिनी बाला किशोरावस्थाकी सूचना देनेवाले अपने गोल-गोल समान और परस्पर सटे हुए स्तनोंको लज्जावश बार-बार अंचलसे ढकती जाती थी॥ २४॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 4.25.24 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 535) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/4/25/24/