राजन्! जो विद्वान् इस प्रकार शास्त्रनियत कर्मोंका आचरण करता है, वह उस कर्मानुष्ठानसे प्राप्त हुए ज्ञानके कारणभूत कर्मोंसे लिप्त नहीं होता॥ ७॥✎ 418
य एवं कर्म नियतं विद्वान् कुर्वीत मानवः।
कर्मणा तेन राजेन्द्र ज्ञानेन न स लिप्यते॥ ७
राजन्! जो विद्वान् इस प्रकार शास्त्रनियत कर्मोंका आचरण करता है, वह उस कर्मानुष्ठानसे प्राप्त हुए ज्ञानके कारणभूत कर्मोंसे लिप्त नहीं होता॥ ७॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 4.26.7 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 540) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/4/26/7/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)