नहीं तो, मनमाना कर्म करनेसे मनुष्य अभिमानके वशीभूत होकर कर्मोंमें बँध जाता है तथा गुण-प्रवाहरूप संसारचक्रमें पड़कर विवेक-बुद्धिके नष्ट हो जानेसे अधम योनियोंमें जन्म लेता है॥ ८॥✎ 418
अन्यथा कर्म कुर्वाणो मानारूढो निबध्यते।
गुणप्रवाहपतितो नष्टप्रज्ञो व्रजत्यधः॥ ८
नहीं तो, मनमाना कर्म करनेसे मनुष्य अभिमानके वशीभूत होकर कर्मोंमें बँध जाता है तथा गुण-प्रवाहरूप संसारचक्रमें पड़कर विवेक-बुद्धिके नष्ट हो जानेसे अधम योनियोंमें जन्म लेता है॥ ८॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 4.26.8 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 540) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/4/26/8/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)