एक दिन मैं ब्रह्मलोकसे पृथ्वीपर आया, तो वह घूमती-घूमती मुझे भी मिल गयी। तब मुझे नैष्ठिक ब्रह्मचारी जानकर भी कामातुरा होनेके कारण उसने वरना चाहा॥ २१॥
कदाचिदटमाना सा ब्रह्मलोकान्महीं गतम्।
वव्रे बृहद्व्रतं मां तु जानती काममोहिता॥ २१
एक दिन मैं ब्रह्मलोकसे पृथ्वीपर आया, तो वह घूमती-घूमती मुझे भी मिल गयी। तब मुझे नैष्ठिक ब्रह्मचारी जानकर भी कामातुरा होनेके कारण उसने वरना चाहा॥ २१॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 4.27.21 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 545) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/4/27/21/