॥ श्रीहरिः ॥
ततो विहतसङ्कल्पा कन्यका यवनेश्वरम्।
मयोपदिष्टमासाद्य वव्रे नाम्ना भयं पतिम्॥ २३
tato vihatasaṅkalpā kanyakā yavaneśvaram|
mayopadiṣṭamāsādya vavre nāmnā bhayaṃ patim|| 23
अर्थ
तब मेरी ओरसे निराश होकर उस कन्याने मेरी सम्मतिसे यवनराज भयके पास जाकर उसका पतिरूपसे वरण किया॥ २३॥
ततो विहतसङ्कल्पा कन्यका यवनेश्वरम्।
मयोपदिष्टमासाद्य वव्रे नाम्ना भयं पतिम्॥ २३
तब मेरी ओरसे निराश होकर उस कन्याने मेरी सम्मतिसे यवनराज भयके पास जाकर उसका पतिरूपसे वरण किया॥ २३॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 4.27.23 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 545) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/4/27/23/