श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 4.27.23

चतुर्थ स्कन्ध · अध्याय 27 · अथ सप्तविंशोऽध्यायः

ततो विहतसङ्कल्पा कन्यका यवनेश्‍वरम्।

मयोपदिष्टमासाद्य वव्रे नाम्ना भयं पतिम्॥ २३

tato vihatasaṅkalpā kanyakā yavaneśvaram|

mayopadiṣṭamāsādya vavre nāmnā bhayaṃ patim|| 23

अर्थ

तब मेरी ओरसे निराश होकर उस कन्याने मेरी सम्मतिसे यवनराज भयके पास जाकर उसका पतिरूपसे वरण किया॥ २३॥

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