श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 4.27.6

चतुर्थ स्कन्ध · अध्याय 27 · अथ सप्तविंशोऽध्यायः

तस्यामजनयत्पुत्रान् पुरंजन्यां पुरंजनः।

शतान्येकादश विराडायुषोऽर्धमथात्यगात्॥ ६

tasyāmajanayatputrān puraṃjanyāṃ puraṃjanaḥ|

śatānyekādaśa virāḍāyuṣo'rdhamathātyagāt|| 6

अर्थ

प्रजापते! उस पुरंजनीसे राजा पुरंजनके ग्यारह सौ पुत्र और एक सौ दस कन्याएँ हुईं, जो सभी माता-पिताका सुयश बढ़ानेवाली और सुशीलता, उदारता आदि गुणोंसे सम्पन्‍न थीं। ये पौरंजनी नामसे विख्यात हुईं। इतनेमें ही उस सम्राट्की लंबी आयुका आधा भाग निकल गया॥ ६-७॥

यह अर्थ श्लोक 6–7 का एक साथ है, जैसा मुद्रित ग्रन्थमें।

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