श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 4.27.8

चतुर्थ स्कन्ध · अध्याय 27 · अथ सप्तविंशोऽध्यायः

स पंचालपतिः पुत्रान् पितृवंशविवर्धनान्।

दारैः संयोजयामास दुहितॄः सदृशैर्वरैः॥ ८ ✎ 1037

sa paṃcālapatiḥ putrān pitṛvaṃśavivardhanān|

dāraiḥ saṃyojayāmāsa duhitṝḥ sadṛśairvaraiḥ|| 8

अर्थ

फिर पांचालराज पुरंजनने पितृवंशकी वृद्धि करनेवाले पुत्रोंका वधुओंके साथ और कन्याओंका उनके योग्य वरोंके साथ विवाह कर दिया॥ ८॥

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
  • #1037 अक्षर (मुद्रित पृष्ठके पाठसे): दुहितृ: → दुहितॄः

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