ऐसी अवस्थामें उनसे बिछुड़नेकी इच्छा न होनेपर भी उसे उस पुरीको छोड़नेके लिये बाध्य होना पड़ा; क्योंकि उसे गन्धर्व और यवनोंने घेर रखा था तथा कालकन्याने कुचल दिया था॥ १०॥
गन्धर्वयवनाक्रान्तां कालकन्योपमर्दिताम्।
हातुं प्रचक्रमे राजा तां पुरीमनिकामतः॥ १०
ऐसी अवस्थामें उनसे बिछुड़नेकी इच्छा न होनेपर भी उसे उस पुरीको छोड़नेके लिये बाध्य होना पड़ा; क्योंकि उसे गन्धर्व और यवनोंने घेर रखा था तथा कालकन्याने कुचल दिया था॥ १०॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 4.28.10 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 547) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/4/28/10/