श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 4.28.9

चतुर्थ स्कन्ध · अध्याय 28 · अथाष्टाविंशोऽध्यायः

कामानभिलषन्दीनो यातयामांश्‍च कन्यया।

विगतात्मगतिस्नेहः पुत्रदारांश्‍च लालयन्॥ ९

kāmānabhilaṣandīno yātayāmāṃśca kanyayā|

vigatātmagatisnehaḥ putradārāṃśca lālayan|| 9

अर्थ

कालकन्याने जिन्हें निःसार कर दिया था, उन्हीं भोगोंकी लालसासे वह दीन था। अपनी पारलौकिकी गति और बन्धुजनोंके स्नेहसे वंचित रहकर उसका चित्त केवल स्त्री और पुत्रके लालन-पालनमें ही लगा हुआ था॥ ९॥

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