कालकन्याने जिन्हें निःसार कर दिया था, उन्हीं भोगोंकी लालसासे वह दीन था। अपनी पारलौकिकी गति और बन्धुजनोंके स्नेहसे वंचित रहकर उसका चित्त केवल स्त्री और पुत्रके लालन-पालनमें ही लगा हुआ था॥ ९॥
कामानभिलषन्दीनो यातयामांश्च कन्यया।
विगतात्मगतिस्नेहः पुत्रदारांश्च लालयन्॥ ९
कालकन्याने जिन्हें निःसार कर दिया था, उन्हीं भोगोंकी लालसासे वह दीन था। अपनी पारलौकिकी गति और बन्धुजनोंके स्नेहसे वंचित रहकर उसका चित्त केवल स्त्री और पुत्रके लालन-पालनमें ही लगा हुआ था॥ ९॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 4.28.9 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 546) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/4/28/9/