उस निर्दय राजाने जिन यज्ञपशुओंकी बलि दी थी, वे उसकी दी हुई पीड़ाको याद करके उसे क्रोधपूर्वक कुठारोंसे काटने लगे॥ २६॥
तं यज्ञपशवोऽनेन संज्ञप्ता येऽदयालुना।
कुठारैश्चिच्छिदुः क्रुद्धाः स्मरन्तोऽमीवमस्य तत्॥ २६
उस निर्दय राजाने जिन यज्ञपशुओंकी बलि दी थी, वे उसकी दी हुई पीड़ाको याद करके उसे क्रोधपूर्वक कुठारोंसे काटने लगे॥ २६॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 4.28.26 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 548) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/4/28/26/