राजन्! फिर उनमेंसे प्रत्येक पुत्रके बहुत-बहुत पुत्र उत्पन्न हुए, जिनके वंशधर इस पृथ्वीको मन्वन्तरके अन्ततक तथा उसके बाद भी भोगेंगे॥ ३१॥
एकैकस्याभवत्तेषां राजन्नर्बुदमर्बुदम्।
भोक्ष्यते यद्वंशधरैर्मही मन्वन्तरं परम्॥ ३१
राजन्! फिर उनमेंसे प्रत्येक पुत्रके बहुत-बहुत पुत्र उत्पन्न हुए, जिनके वंशधर इस पृथ्वीको मन्वन्तरके अन्ततक तथा उसके बाद भी भोगेंगे॥ ३१॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 4.28.31 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 549) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/4/28/31/