श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 4.28.32

चतुर्थ स्कन्ध · अध्याय 28 · अथाष्टाविंशोऽध्यायः

अगस्त्यः प्राग्दुहितरमुपयेमे धृतव्रताम्।

यस्यां दृढच्युतो जात इध्मवाहात्मजो मुनिः॥ ३२

agastyaḥ prāgduhitaramupayeme dhṛtavratām|

yasyāṃ dṛḍhacyuto jāta idhmavāhātmajo muniḥ|| 32

अर्थ

राजा मलयध्वजकी पहली पुत्री बड़ी व्रतशीला थी। उसके साथ अगस्त्य ऋषिका विवाह हुआ। उससे उनके दृढ़च्युत नामका पुत्र हुआ और दृढ़च्युतके इध्मवाह हुआ॥ ३२॥

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