श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 4.28.33

चतुर्थ स्कन्ध · अध्याय 28 · अथाष्टाविंशोऽध्यायः

विभज्य तनयेभ्यः क्ष्मां राजर्षिर्मलयध्वजः।

आरिराधयिषुः कृष्णं स जगाम कुलाचलम्॥ ३३

vibhajya tanayebhyaḥ kṣmāṃ rājarṣirmalayadhvajaḥ|

ārirādhayiṣuḥ kṛṣṇaṃ sa jagāma kulācalam|| 33

अर्थ

अन्तमें राजर्षि मलयध्वज पृथ्वीको पुत्रोंमें बाँटकर भगवान् श्रीकृष्णकी आराधना करनेकी इच्छासे मलय पर्वतपर चले गये॥ ३३॥

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