तप और उपासनासे वासनाओंको निर्मूल कर तथा यम-नियमादिके द्वारा इन्द्रिय, प्राण और मनको वशमें करके वे आत्मामें ब्रह्मभावना करने लगे॥ ३८॥
तपसा विद्यया पक्वकषायो नियमैर्यमैः।
युयुजे ब्रह्मण्यात्मानं विजिताक्षानिलाशयः॥ ३८
तप और उपासनासे वासनाओंको निर्मूल कर तथा यम-नियमादिके द्वारा इन्द्रिय, प्राण और मनको वशमें करके वे आत्मामें ब्रह्मभावना करने लगे॥ ३८॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 4.28.38 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 549) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/4/28/38/