taṃ skandhena sa ādhatte tathā sarvāḥ pratikriyāḥ|| 33
अर्थ
वह ऐसी ही है जैसे कोई सिरपर भारी बोझा ढोकर ले जानेवाला पुरुष उसे कंधेपर रख ले। इसी तरह सभी प्रतिक्रिया (दुःखनिवृत्ति) जाननी चाहिये—यदि किसी उपायसे मनुष्य एक प्रकारके दुःखसे छुट्टी पाता है, तो दूसरा दुःख आकर उसके सिरपर सवार हो जाता है॥ ३३॥✎ 1607
यथा हि पुरुषो भारं शिरसा गुरुमुद्वहन्।
तं स्कन्धेन स आधत्ते तथा सर्वाः प्रतिक्रियाः॥ ३३
वह ऐसी ही है जैसे कोई सिरपर भारी बोझा ढोकर ले जानेवाला पुरुष उसे कंधेपर रख ले। इसी तरह सभी प्रतिक्रिया (दुःखनिवृत्ति) जाननी चाहिये—यदि किसी उपायसे मनुष्य एक प्रकारके दुःखसे छुट्टी पाता है, तो दूसरा दुःख आकर उसके सिरपर सवार हो जाता है॥ ३३॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 4.29.33 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 557) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/4/29/33/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)