॥ श्रीहरिः ॥
श्लोक 4.29.75
अनेन पुरुषो देहानुपादत्ते३ विमुंचति।
हर्षं शोकं भयं दुःखं सुखं चानेन विन्दति॥ ७५
anena puruṣo dehānupādatte vimuṃcati|
harṣaṃ śokaṃ bhayaṃ duḥkhaṃ sukhaṃ cānena vindati|| 75
अर्थ
इसीके द्वारा पुरुष भिन्न-भिन्न देहोंको ग्रहण करता और त्यागता है तथा इसीसे उसे हर्ष, शोक, भय, दुःख और सुख आदिका अनुभव होता है॥ ७५॥
टिप्पणियाँ
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प्रा० पा०—देहमुपादत्ते।