सतीने कहा—वामदेव! सुना है, इस समय आपके ससुर दक्षप्रजापतिके यहाँ बड़ा भारी यज्ञोत्सव हो रहा है। देखिये, ये सब देवता वहीं जा रहे हैं; यदि आपकी इच्छा हो तो हम भी चलें॥ ८॥
प्रजापतेस्ते श्वशुरस्य साम्प्रतं
निर्यापितो यज्ञमहोत्सवः किल।
वयं च तत्राभिसराम वाम ते
यद्यर्थितामी विबुधा व्रजन्ति हि॥ ८
सतीने कहा—वामदेव! सुना है, इस समय आपके ससुर दक्षप्रजापतिके यहाँ बड़ा भारी यज्ञोत्सव हो रहा है। देखिये, ये सब देवता वहीं जा रहे हैं; यदि आपकी इच्छा हो तो हम भी चलें॥ ८॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 4.3.8 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 416) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/4/3/8/