श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 4.30.11

चतुर्थ स्कन्ध · अध्याय 30 · अथ त्रिंशोऽध्यायः

यद्यूयं पितुरादेशमग्रहीष्ट मुदान्विताः।

अथो व उशती कीर्तिर्लोकाननु भविष्यति॥ ११

yadyūyaṃ piturādeśamagrahīṣṭa mudānvitāḥ|

atho va uśatī kīrtirlokānanu bhaviṣyati|| 11

अर्थ

तुमलोगोंने बड़ी प्रसन्‍नतासे अपने पिताकी आज्ञा शिरोधार्य की है, इससे तुम्हारी कमनीय कीर्ति समस्त लोकोंमें फैल जायगी॥ ११॥✎ 422

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
  • #422 शब्दोंके बीचका स्थान: श्रीभगवान् ने → श्रीभगवान्‌ने

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