श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 4.30.12

चतुर्थ स्कन्ध · अध्याय 30 · अथ त्रिंशोऽध्यायः

भविता विश्रुतः पुत्रोऽनवमो ब्रह्मणो गुणैः।

य एतामात्मवीर्येण त्रिलोकीं पूरयिष्यति॥ १२

bhavitā viśrutaḥ putro'navamo brahmaṇo guṇaiḥ|

ya etāmātmavīryeṇa trilokīṃ pūrayiṣyati|| 12

अर्थ

तुम्हारे एक बड़ा ही विख्यात पुत्र होगा। वह गुणोंमें किसी भी प्रकार ब्रह्माजीसे कम नहीं होगा तथा अपनी सन्तानसे तीनों लोकोंको पूर्ण कर देगा॥ १२॥✎ 422

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
  • #422 शब्दोंके बीचका स्थान: श्रीभगवान् ने → श्रीभगवान्‌ने

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