श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 4.30.13

चतुर्थ स्कन्ध · अध्याय 30 · अथ त्रिंशोऽध्यायः

कण्डोः प्रम्लोचया लब्धा कन्या कमललोचना।

तां चापविद्धां जगृहुर्भूरुहा नृपनन्दनाः॥ १३

kaṇḍoḥ pramlocayā labdhā kanyā kamalalocanā|

tāṃ cāpaviddhāṃ jagṛhurbhūruhā nṛpanandanāḥ|| 13

अर्थ

राजकुमारो! कण्डु ऋषिके तपोनाशके लिये इन्द्रकी भेजी हुई प्रम्लोचा अप्सरासे एक कमलनयनी कन्या उत्पन्‍न हुई थी। उसे छोड़कर वह स्वर्गलोकको चली गयी। तब वृक्षोंने उस कन्याको लेकर पाला-पोसा॥ १३॥

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