श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 4.30.49

चतुर्थ स्कन्ध · अध्याय 30 · अथ त्रिंशोऽध्यायः

चाक्षुषे त्वन्तरे प्राप्ते प्राक्सर्गे कालविद्रुते।

यः ससर्ज प्रजा इष्टाः स दक्षो दैवचोदितः॥ ४९

cākṣuṣe tvantare prāpte prāksarge kālavidrute|

yaḥ sasarja prajā iṣṭāḥ sa dakṣo daivacoditaḥ|| 49

अर्थ

इन्हीं दक्षने चाक्षुष मन्वन्तर आनेपर, जब कालक्रमसे पूर्वसर्ग नष्ट हो गया, भगवान्‌की प्रेरणासे इच्छानुसार नवीन प्रजा उत्पन्‍न की॥ ४९॥✎ 424 425 1349

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (3)
  • #424 शब्दोंके बीचका स्थान: भगवान् की → भगवान्‌की
  • #425 शब्दोंके बीचका स्थान: श्रीभगवान् ने → श्रीभगवान्‌ने
  • #1349 अक्षर (मुद्रित पृष्ठके पाठसे): श्रीहरि-की → श्रीहरिकी

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